बसें नहीं जाने दी।
1000 से कम थी शायद
कुछ बस नहीं स्कूल बस थीं।
कुछ के फिटनेस का मामला था शायद
कुछ चालकों के लाईसेंस भी हो गये होंगे पुराने
इसीलिए क़ायदे क़ानून की पक्की सरकार ने नहीं दी इजाज़त
कि चलें वो अन्फीट बसें।
अच्छा किया सरकार
गिनती में कम, कागज़ों में कच्ची बसों को नहीं चलने दिया
प्रदेश की सड़कों पर
लेकिन सरकार
ये जो भूखे प्यासे मज़दूर
नंगे पैर चले जा रहे हैं सड़कों पर
उनके सेहत की जांच तो कर ली होगी ना
आपके होनहार अफसरों ने
जांच ली होगी उनके पैरों की ताक़त
देख लिया होगा फिटनेस उन मासूम पैरों का
जो जल रहे हैं तपती सड़कों पर दिन रात घिसटते
पीछे पीछे अपनी माँ के
देख ली होगी योग्यता हामला औरतों का कि वो चल सकतीं हैं मोलों मील पैदल
ढ़ोती अपने पेट में पल रहे मासूम जान को
उन कमज़ोर लाचार बुढ़ी औरतों का कि उनके पैर नहीं छोड़ेंगे
उनका साथ उनकी ज़िन्दगी से पहले
ठीक से जांच करवा लेना सरकार
क्यों कि कुछ नामुराद लोगों को शक़ है कि
शहरों में काम करते हुए उन्होंने नहीं खाया है पुरा भोजन
साल दर साल
क्योंकि, हां, कुछ हसद के मारे तो यहां तक कहते हैं कि
कभी मिली नहीं इतनी मज़दूरी कि
दे सकें वो अपने बच्चों को पुरा इलाज
इसिलिए अच्छा किया सरकार कि स्थगित कर दिया आपने
कम से कम मज़दूरी का क़ानून
अब शायद दे दें सेठ जी उनको भरपूर मज़दूरी
लेकिन वो तो खैर जब होगा तब होगा।
अभी तो ज़रूर देख लें सरकार आप
उनकी फिटनेस
देख ही लिया होगा सरकार आपने
किसी को हो ना हो
हमें है पुरा यक़ीन
वर्ना ऐसे कैसे चल रहे हैं वो पैदल आपके राज में
आपके राज पथों पर बिना करवाये फिटनेस की जांच।
नेसार अहमद
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