Thursday, February 27, 2020

क़ातिल को मसीहा लिखते रहो

तानाशाहों के यशोगान लिखने वाले कवियों 
अन्य धर्मों, जातियों, राष्ट्रों से विद्वेष रखने वाले लेखकों 
ज़हरीले भाषण देते राजनेताओं  
हत्यारी भीड़ में शामिल मासूम लोगों 

मैं जानता हूँ कि आज तुम्हारा है, और शायद कल भी तुम्हारा कुछ नहीं होना।

अनगिनत मासूमों की लाशें
दुःखी औरतों की चीखें 
बच्चों की बिलखती आवाज़ 
बुजुर्गों की ग़मज़दा सिसकियाँ 
ये सब तुम्हारे लिये तुम्हारे तुच्छ स्वार्थों से बहुत छोटे हैं ।

तुम अपने पुरस्कारों, पारितोषिकों, कुर्सियों, पदों, सुविधाओं 
और कुछ  नहीं तो 'अन्यों' को सबक़ सिखा देने 
के अपने चरम सुखों की लिप्सा में, 
ख़ुशी से अपना ज़मीर बेचते रहो।
रात को दिन
अंधेरे को उजाला 
स्याह को सफेद 
क़ातिल को मसीहा 
लिखते रहो
समझते रहो।

नेसार