विकास एक शापित शब्द है
यह धो देता है एक हत्यारे के दामन के दाग़ तथा बना देता है उसे एक मसीहा
विकास के जाप से एक हत्यारा गिरोह दिखने लगता है एक प्रगतिशील समूह
जिसके हाथों लोग सौंप देते हैं अपना भविष्य
विकास लूट लेता है ग़रीबों, किसानों, आदिवासियों की ज़मीन
छीन लेता है उनसे उनके जंगल, पहाड़ और नदियाँ
कर देता है उन्हें बेघर और विस्थापित
शहरों में अंटी पड़ी प्रदुषण फैलाती गाड़ियों की भीड़, ऊँचे फलाई ओवर, चौड़ी होती सड़कें
और ऊँचे से ऊँचे मॉल प्रतिक हैं विकास के
ऊँचे और बड़े बांध, बड़े बड़े कारखाने, जंगलों को बर्बाद करते खदान
ही वो जगह हैं जहाँ पैदा होता है विकास
बर्बाद जंगल, ढहते पहाड़, गंद्लाती नदियाँ
परिणाम हैं इस विकास का
जीडीपी के आंकड़ों का मायाजाल, शेयर बाज़ार के सूचकांक का गिरना उतरना पैमाने हैं विकास के
इसमें कहीं नहीं हैं हमारी और आपकी ज़िन्दगी से जुड़े सवाल
इसमें नहीं है भूखे कमज़ोर बच्चों के होंटों की मुस्कान
इसमें नहीं है ग़रीब कमज़ोर लाचार माओं के चेहरे की आशा – निराशा
इसमें नहीं है बूढ़े बीमार पिताओं के इलाज का सामान
इसमें नहीं है नौजवानों के रोज़गार के सवाल या लड़कियों की शिक्षा के उपाए
हाँ, विकास बस एक अभिशाप है
