Monday, September 29, 2014

विकास का बुलडोज़र, ग़रीबों के आंसू और विकास की खुमारी में झूमता एक शहर

जेडीए की वेबसाइट पर उपलब्ध मानचित्र 
यह जयपुर नहीं पुरे हिंदुस्तान की कहानी है जो विकास की खुमार में डूबा हुआ है और विकास के बुलडोज़रों के निचे दब जाने वाले आंसुओं की परवाह किसी को नहीं है सिवाए उनके जिनके घर उजड़  रहे हैं  और खेत छिन रहे हैं I 

जयपुर में पिछले कई दिनों से रिंग रोड के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ज़मीन का अधिग्रहण किया जा रहा हैI जयपुर का रिंग रोड जयपुर शहर के चारों तरफ 144.75 किलोमीटर एक 6 लेन की सड़क होगी I सड़क की चौड़ाई 90 मीटर है जबकि इस के दोनों तरफ कुल 270 मीटर जमीन पर रियल  स्टेट विकसित होगा, मॉल्स और मल्टीप्लेक्सेज बनेंगे और ऊँची बहु मंजिली इमारतें खड़ी की जाएँगी I विकास की ये सारी कवायद एक विदेशी कम्पनी करेगी I इस विकास से किसको कितना लाभ होगा कुछ स्पष्ट नहीं है I विकास की इस प्रक्रिया में कितने किसान अपनी खेती की ज़मीन खो रहे हैं, कितने ग़रीबो के आशियाने उजाड़ रहे हैं इस की कोई स्पष्ट जानकारी कहीं एक जगह उपलब्ध नहीं है I

परियोजना में अपनी ज़मीन खोने वाले किसान उच्च न्यायलय तक गुहार लगा आये कि सरकार उनसे 90 मीटर सड़क के लिए आवश्यक ज़मीन ले ले लेकिन सड़क के दोनों तरफ जो मॉल्स वगैरह के लिए ज़मीन ली जा रही है वो ना ली जाये I लेकिन विकास की खुमारी में डूबे कोर्ट ने भी उनकी नहीं सुनी और परियोजना में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया I

विडम्बना यह भी है कि रिंग रोड के लिए भूमि का अधिग्रहण चूँकि पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किया जा रहा है इसलिए प्रभावितों और विस्थापितों को पिछले वर्ष पारित भूमि अधिग्रहण कानून का भी कोई लाभ नहीं मिलेगा I उन्हें केवल मुआवज़ा मात्र पे सब्र करना होगा I ऐसे में जिन ग़रीबों के घर अभी टूट रहे हैं वो कहाँ जायेंगेI दैनिक भास्कर के अनुसार लोग पूछ रहे हैं कि क्या सरकार उन्हें एक घर भी नहीं दे सकती!
पीड़ा भरा प्रश्न : कई ऐसे लोगों के आशियानें उजड़ रहे हैं, जिनके पास रहने को छत नहीं है। कई लोग गरीबी रेखा में हैं, उनके पास जमीनें भी नहीं हैं। मुआवजे से जगह खोजकर छत बनाना मुश्किल है। जेडीए ऐसे लोगों को अफोर्डेबल हाउसिंग योजना में मकान नहीं दे सकता क्या? दे तो मदद मिले। (दैनिक भास्कर, जयपुर सितम्बर 30)
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25 सितम्बर 2014 के दैनिक भास्कर से  
सैकड़ों नहीं हजारों पुलिस वालों की मदद से जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना के पहले और दुसरे चरण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में लोगों के हारे मन से किये जा रहे विरोध और उनके आंसुओं का विकास के निर्मम और कठोर बुलडोज़रों पर कोई असर नहीं है I सरकार ने शहर में बड़े बड़े होर्डिंग्स लगवा दिए हैं, जिनमें रिंग रोड परियोजना के लिए सफलता पूर्वक भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है I अखबारों में विकास का जश्न है तथा सरकार के लिए शाबाशी का भाव है I शहर नवरात्र की रोशनियों में गरबा नृत्य पर थिरक रहा है तथा 'जयपुर बाई नाईट' की खुमार डूबता उतरता है I

लेकिन अखबारों के पन्नों पर उजड़ रहे किसानों और ग़रीबों के आंसुओं की बूँद भी कहीं कहीं छलक ही पड़ती हैंI आप भी देख सकते हैं bhaskar.com से साभार ली गयीं कुछ तस्वीरें ............

विकास का बुलडोज़र और ग़रीबों के आंसू (तस्वीरें भास्कर.कॉम से साभार - लिंक यहाँ )

PICS: पहले आंखो के सामने तोड़ा आशियाना फिर खुद ही पोछ दिए आंसू

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