Wednesday, August 13, 2014

Rajasthan Land Acquisition Bill 2014: Taking Away People's Right



Published in the Hindustan Times August 14, 2014 Jaipur edition

A longer version of this article is available on: http://www.developmentdebate.in/2014/08/rajasthan-land-acquisition-bill-2014.html


Monday, August 11, 2014

राजस्थान के अच्छे दिन

राजस्थान की जनता बड़ी दूरदर्शी है। उनहोंने केंद्र में नयी सरकार आने के छह माह पूर्व ही अच्छे दिनों की पदचाप सुन ली थी  और इसीलिए राज्य में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत दे कर सत्ता में लायी। भारतीय जनता पार्टी ने जैसा कि पहले से तय था, महारानी वसुंधरा राजे सिंधिया जी को मुख्यमंत्री बनाया।

महारानी ने सत्ता सँभालते ही सबसे पहले ये किया कि राज्य आयोजना समिति (स्टेट पलानिंग बोर्ड) का पुनर्गठन किया तथा इस बोर्ड में देश के बड़े बड़े उद्योगपतियों, दिल्ली के एक अर्थशास्त्री, बंगलुरु के गवर्नेंस एक्सपर्ट्स और राज्य के कुछ भूतपूर्व तथा वर्तमान बड़े अधिकारीयों को रखा ।

परन्तु तुरंत ही महारानी मतलब मुख्यमंत्री महोदया को यह राज्य आयोजना समिति नाकाफी लगी और उनहोंने उसे भंग कर एक मुख्यमंत्री सलाहकार परिषद् (पूर्व केंद्र सरकार से कुछ तो सिखना चाहिए ना) का गठन किया जिसमें पूर्व की आयोजना समिति के अधिकांश सदस्यों के अलावा विदेश में पढ़ा रहे एक भारतीय अर्थशास्त्री, जिनका नाम देश के प्रधान मंत्री के आर्थिक सलाहकार के संभावितों में भी चला था, को शामिल किया। अपनी पहली ही बैठक में  इस सलाहकार परिषद् ने महारानी को ये सलाह दे डाली कि अगर राज्य में अच्छे दिन लाने हैं तो सरकार जनता को कुछ भी मुफ्त ना बाँटे ।

परन्तु राज्य की सरकार को इस सलाह का इंतज़ार कब था । सरकार ने तो अच्छे दिनों के प्रयास पहले ही आरंभ कर दिए थे। सरकार ने जुलाई में पेश किये बजट में और उसके बाद से ही मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना, मुख्यमंत्री निःशुल्क जाँच योजना का दायरा सिमित करने, खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थियों की संख्या कम करने, सहारिया परिवारों को मुफ्त मिल रहे अनाज तथा अन्य सुविधाओं को बंद करने, बी.पी.एल. तथा अन्त्योदय परिवारों को अनाज 1 रुपये प्रति किलो की बजाय 2 रुपये प्रति किलो करने जैसे क़दम उठा चुकी थी । राज्य में अच्छे दिन लाने के प्रयासों  की यह शुरुवात भर है।

राज्य में अच्छे दिनों को लाने के प्रयासों में महारानी के अन्य प्रयास भी अत्यंत महत्तवपूर्ण हैं । उन्होंने पहले ही केंद्र सरकार को एक पत्र लिख कर महनारेगा को कानून के बजाये एक सामान्य योजना / कार्यक्रम में बदलने का सुझाव दे डाला था, जिसे केंद्र की सरकार ने अपनी अदुर्दार्शिता में नहीं माना।

अब राजस्थान सरकार ने विधान सभा के बजट सत्र में ही रज्य में चार श्रम कानूनों में संशोधन के विधेयक पास किये हैं, जो राज्य में (शुक्र है) तभी लागु होंगे जब उन्हें राष्ट्रपति का अनुमोदन मिलेगा । ये संशोधन राज्य में  कम्पनियों को अपनी मर्ज़ी से मजदूरों को निकल बहार करने के अधिकार पर लगे रोक को कम करेंगे तथा फक्ट्रियों में मजदूरों की सुरक्षा सुवाधिओं एवं पर्यावरण सुरक्षा की बाध्यता को कम करेंगे तथा मजदूरों के यूनियन बनाने के अधिकार को कम करेंगे।

अच्छे दिनों की तरफ एक और क़दम बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने अब एक नया भूमि अधिग्रहण कानून का मसौदा भी बनाया है, जो पिछले वर्ष भूमि अधिग्रहण पर बनाये गये केन्द्रीय कानून, जिसे भारतीय जनता पार्टी ने भी पारित होने दिया था, को नज़रंदाज़ करते हुए, उद्योगों के विशेष मांग पर,  सामाजिक प्रभावों के अध्ययन तथा पुनर्वास जैसे शर्तों को समाप्त करने, भूमि अधिग्रहण के लिए प्राधिकरण बनाने तथा भूमि अधिग्रहण के लिए न कहने वालों को सजा देने के प्रावधान करता है ।

जुलाई में पेश किये गए राज्य बजट में सारा जोर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के द्वारा सड़कों का जाल फ़ैलाने और शहरीकरण करने पर दिया गया है । अच्छे दिनों की पड़ताल में निजी क्षेत्र की भागीदारी की ये क़वायद स्वाभविक रूप से राज्य में मुख्यमंत्री सलाहकार परिषद् में उद्योगपतियों को शामिल करने, उनकी सुविधा के अनुसार श्रम तथा भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव करने तथा मुफ्त की योजनाओं को समाप्त करने की दिशा में ही जाती है ।

हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की राजस्थान में तो अच्छे दिन आ ही चुके हैं । साथ ही केंद्रीय श्रम कानूनों तथा भूमि अधिग्रहण पर पिछले वर्ष पारित केंद्रीय कानून की अनदेखी करने की राज्य सरकार की पहल अन्य राज्यों को भी अच्छे दिन लाने की दिशा में किये जा सकने वाले प्रयासों की सीख देगा ।
16 अगस्त, 2014 के मददगार, उदयपुर में प्रकाशित