Saturday, September 22, 2012

संपन्न देश की अमीर सरकार के ग़रीब प्रधान मंत्री जी के लिए सहानुभूती के दो शब्द


डेली न्यूज़, जयपुर 24 सितंबर 2012
प्रधान मंत्री ने फिर से बोला हैI यह शिकायत अब दूर हो जानी चाहिए की हमारे प्रधान मंत्री जी बोलते नहीं हैंI और इस बार उन्हों ने एक अत्यंत महत्तवपूर्ण बात भी बतायी हैI डीज़ल की क़ीमतें बढ़ाने, रियायती मूल्यों पर गैस सिलेंडर की बिक्री सीमित करने और देश में विदेशी कंपनियों की खुदरा दुकानें खोले जाने के फ़ायदों और आवश्यकता पर बात करते हुए, प्रधान मंत्री जी ने यह भी कहा कि “रुपया कोई पेड़ पर नहीं उगता”I बचपन से हम सुनते आए हैं कि पैसा कोई पेड़ पर नहीं उगताI मध्यमवर्गीय घरों में बड़ों बूढ़ों का तो जैसे यह तकिया कलाम होता हैI अब इस देश के प्रधान मंत्री ने भी वही कहना शुरू का दिया हैI लो भाई अब झेलो I

लेकिन यह कौन कह रहा है I ज़रा यह भी सोचिए I

ये उस देश के प्रधान मंत्री हैं, जिसने अभी हाल ही में कई अरब रुपये खर्च कर अब तकके सब से मंहगे कॉमन वैल्थ खेल करवाये हैंI इन अरबों रुपयों में से पता नहीं कई सौ करोड़, घोटालों की बदौलत, कलमाड़ियों की जेब या बैंक अकाउंट में गए हैं इसकी खोज बीन जारी है I

ये वो देश है जिसने 9% तक की आर्थिक वृधी की दर को प्राप्त किया है तथा जिसकी आर्थिक वृधी की दर अभी भी विश्व में सबसे ऊपर कुछ देशों में एक है तथा जिसके लिए प्रधान मंत्री जी और उनकी पार्टी हमेशा अपना पीठ ठोकती रही है I

ये उस देश के प्रधान मंत्री हैं, जहाँ उद्योगपतियों तथा बड़े व्यापारियों को विभिन्न करों में सालाना 5 लाख करोड़ से अधिक की छूट दी जाती है I

ये उस देश के प्रधान मंत्री जी बोल रहे हैं, जहाँ के योजना आयोग में दो बाथरूम 35 लाख रुपये खर्च कर ठीक करवाये जाते हैं I जहाँ योजना आयोग के उपाध्यक्ष का विदेश दौरों का खर्च 2 लाख रुपए रोज़ाना का होता है I

ये उस देश के प्रधान मंत्री जी कह रहे हैं जहाँ परमाणु बम तथा तरह तरह के अत्यंत महंगे हथियारों की खरीद पे हर वर्ष कई लाख करोड़ खर्च किए जाते हैं I जहाँ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों पर अरबों खर्च हो रहे हैं I

ये वो देश है जहाँ कोयला, लोहा, अबरक, ताँबा, सोना, चाँदी, हीरा, यूरेनियम, तरह तरह के पत्थर, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, स्पेक्ट्रम सबकी लूट मची हुई है I सरकार द्वारा कौड़ी के भाव में दिये जा रहे इन प्राकृतिक संसाधनों को देशी – विदेशी कंपनियों द्वारा क़ानूनी व ग़ैर क़ानूनी तरीकों निकाला जा रहा है और उपयोग किया जा रहा है या निर्यात किया जा रहा है, जिन से वो खरबों कमा रही हैं I

लेकिन, जैसा की सीएजी ने दिखाया है, इन प्राकृतिक संसाधनों की बंदरबांट में देश के खजाने को लाखों करोड़ का नुक़सान हो रहा है

ये उस देश के प्रधान मंत्री जी कह रहे हैं जहाँ हर साल लाखों टन अनाज सरकारी लापरवाही और सब्सिडी को कम रखने की सरकारी ज़िद के कारण सड़ जाता है I

पैसा कोई पेड़ पर नहीं उगता कहने वाले मनमोहन सिंह जी कोई ग़रीब या मध्यमवर्गीय परिवार के मुखिया नहीं हैं बल्कि प्राकृतिक संसाधनों, जंगलों, ज़मीन, जल, जन से धनवान एक देश के एक अत्यंत अमीर परंतु लापरवाह एवं भ्रष्ट सरकार के मुखिया हैं, जिसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की उसके नागरिक मंहगाई, ग़रीबी, बेरोज़गारी, भूखमरी, बीमारी, अशिक्षा, आदि से जूझ रहे हैं I

इस अमीर व लापरवाह सरकार को सिर्फ़ देशी विदेशी कंपनियों तथा शेयर बाज़ार के दलालों के सेंटिमेंट्स तथा विदेशी मीडिया की नज़र में अपनी इमेज को अच्छा बनाये रखने की फिक्र है I

प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न इस देश के अमीर सरकार के ग़रीब प्रधान मंत्री जी हमारी सहानुभूती आपके साथ है I

Tuesday, September 11, 2012

राजद्रोह, देशद्रोह, विदेशी हाथ, विदेशी एनजीओ और देशी धंधा: एक राजनेता का बयान


भूमिका: सरकार के यह पसंदीदा हथियार हैं I जिसे चाहो गिरफ्तार करो, जिसे चाहो सज़ा दो I कम से कम निचली अदालतें तो इन आपराधों के मामले में पुलिस और सरकार के तर्कों को ही सही मानती हैं I इस देश में पुलिस चोरी, डकैती, हत्या, लूट, बलात्कार, व भ्रष्टाचार के मामलों में जितनी ढिलाई से काम लेती है, राजद्रोह, राष्ट्रद्रोह आदि के मामलों में उतनी ही तत्परता दिखती है I तो स्थिति ये बनती है जनाब कि आप चोरी करो, डाके डालो, बलात्कार करो, हत्या भी कर दो तो एक बार बच जाओगे, लेकिन इस देश की देशप्रेमी सरकार और पुलिस आपको राजद्रोह, देशद्रोह करने पर बिलकूल नहीं छोड़ेंगे I