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| डेली न्यूज़, जयपुर 24 सितंबर 2012 |
लेकिन यह कौन कह रहा है I ज़रा
यह भी सोचिए I
ये उस देश के प्रधान
मंत्री हैं, जिसने अभी हाल ही में कई अरब रुपये खर्च कर अब तकके सब से मंहगे कॉमन वैल्थ खेल करवाये हैंI
इन अरबों रुपयों में से पता नहीं
कई सौ करोड़, घोटालों की बदौलत, कलमाड़ियों की जेब या बैंक
अकाउंट में गए हैं इसकी खोज बीन जारी है I
ये वो देश है जिसने 9% तक
की आर्थिक वृधी की दर को प्राप्त किया है तथा जिसकी आर्थिक वृधी की दर अभी भी
विश्व में सबसे ऊपर कुछ देशों में एक है तथा जिसके लिए प्रधान मंत्री जी और उनकी
पार्टी हमेशा अपना पीठ ठोकती रही है I
ये उस देश के प्रधान
मंत्री हैं, जहाँ उद्योगपतियों तथा बड़े व्यापारियों को विभिन्न
करों में सालाना 5 लाख करोड़ से अधिक की छूट दी जाती है I
ये उस देश के प्रधान
मंत्री जी बोल रहे हैं, जहाँ के योजना आयोग में दो बाथरूम 35 लाख रुपये खर्च कर ठीक करवाये जाते हैं I
जहाँ योजना आयोग के उपाध्यक्ष का विदेश दौरों का खर्च 2 लाख रुपए रोज़ाना का होता है I
ये उस देश के प्रधान मंत्री
जी कह रहे हैं जहाँ परमाणु बम तथा तरह तरह के अत्यंत महंगे हथियारों की खरीद पे हर वर्ष कई लाख करोड़ खर्च किए जाते हैं I
जहाँ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों पर अरबों खर्च हो रहे हैं I
ये वो देश है जहाँ कोयला,
लोहा, अबरक, ताँबा, सोना, चाँदी, हीरा, यूरेनियम, तरह तरह के पत्थर, पेट्रोलियम,
प्राकृतिक गैस, स्पेक्ट्रम सबकी लूट मची हुई है I सरकार
द्वारा कौड़ी के भाव में दिये जा रहे इन प्राकृतिक संसाधनों को देशी – विदेशी
कंपनियों द्वारा क़ानूनी व ग़ैर क़ानूनी तरीकों निकाला जा रहा है और उपयोग किया जा
रहा है या निर्यात किया जा रहा है,
जिन से वो खरबों कमा रही हैं I
लेकिन,
जैसा की सीएजी ने दिखाया है, इन प्राकृतिक संसाधनों की बंदरबांट में देश के
खजाने को लाखों करोड़ का नुक़सान हो रहा है I
ये उस देश के प्रधान मंत्री जी कह रहे हैं जहाँ हर साल लाखों टन अनाज सरकारी लापरवाही और सब्सिडी को कम रखने की सरकारी ज़िद के कारण सड़ जाता है I
ये उस देश के प्रधान मंत्री जी कह रहे हैं जहाँ हर साल लाखों टन अनाज सरकारी लापरवाही और सब्सिडी को कम रखने की सरकारी ज़िद के कारण सड़ जाता है I
पैसा कोई पेड़ पर नहीं उगता
कहने वाले मनमोहन सिंह जी कोई ग़रीब या मध्यमवर्गीय परिवार के मुखिया नहीं हैं
बल्कि प्राकृतिक संसाधनों, जंगलों, ज़मीन, जल, जन से धनवान एक देश के एक अत्यंत अमीर परंतु
लापरवाह एवं भ्रष्ट सरकार के मुखिया हैं, जिसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की उसके नागरिक
मंहगाई, ग़रीबी, बेरोज़गारी, भूखमरी, बीमारी, अशिक्षा, आदि से जूझ रहे हैं I
इस अमीर व लापरवाह सरकार
को सिर्फ़ देशी विदेशी कंपनियों तथा शेयर बाज़ार के दलालों के सेंटिमेंट्स तथा
विदेशी मीडिया की नज़र में अपनी इमेज को अच्छा बनाये रखने की फिक्र है I
प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न
इस देश के अमीर सरकार के ग़रीब प्रधान मंत्री जी हमारी सहानुभूती आपके साथ है I
